खोजते जिसे स्वयं भगवान

पारंपरिक
श्री राम भजन विष्णु भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

कहां छुपा बैठा है अब तक वह सच्चा इंसान,

खोजते जिसे स्वयं भगवान,

जिसने रूखा सूखा खाया ,

पर न कहीं ईमान गवाया ,

उसने ही यह भोग लगाया ,

जिसे राम ने रूचि से खाया ,

स्वार्थ रहित सेवा ही उसकी , सेवा सुधा समान,

खोजते जिसे स्वयं भगवान ॥

जिसने जानी पीर पराई ,

परहित में निज देह खपाई ,

जिसने लगन दीप की पाई ,

तिल तिल कर निज देह जलाई ,

उसकी आभा से ही होगा , देवी का सम्मान,

खोजते जिसे स्वयं भगवान ॥

By योगेश तिवारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।