भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले

संजय मित्तल
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले,

मंजिले ला पता श्याम कैसे चले,

ऐसे में सँवारे तू बता क्या करे गाहव अब भी हरा जाने कैसे भरे,

देती ही रहती है दर्द ये दिल लगी,

जाना अब सांवरे क्या है ये ज़िंदगी,

ज़िंदगी वो नदी उच्च लेहरो भरी तैरने का हमे कुछ तजुर्बा नहीं,

पहुंचा पानी गले ना किनारे मिले,

मंजिले ला पता श्याम कैसे चले,

भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले,

हाल बेहाल है आँखों में है नमी,

वक़्त भागे भड़ा हसरते है थमी,

राहते कुछ नहीं आजमाती कमी,

सूखे अरमानो की टूटी फूटी ज़मीन,

करदे तू एक नजर ट्रिप वर सा पड़े,

मंजिले ला पता श्याम कैसे चले

भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले,

दास की देवकी किस की तोहीन है,

भक्त की ये दशा क्यों गम गीन है,

भड़ते मेरे कदम पर दशा हीं है,.

पूछते है पता वो कहा लीन है.

हाल पे कदमो का जोर भी न चले,

मंजिले ला पता श्याम कैसे चले

भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले,

हो गई है खता तो सजा दीजिये,

प्रेम से प्रेम की पर सुलह कीजिये,

मोन अब न रहे कुछ बता दीजिये,

चुप से मुझसे ख़ुशी का अब पता दीजिये,

ढूंढे निर्मल तुझे अब लगा लो गले.

मंजिले ला पता श्याम कैसे चले

भीगी पलकों तले सेहमी ख्वाइश पले,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।