मैं लख लख शुक्र मनाऊ शमा शम नाचू गाऊ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बरसा तेरा प्यार मेरे परिवार पे माता रानी,

आज मेरे घर में भी जागी तेरी ज्योत नूरानी,

मैं लख लख शुक्र मनाऊ शमा शम नाचू गाऊ,

गूंजे मेरे अंगना में शुभ शहनाइयां,

आते जाते लोग मुझे देते है वदाइयां,

दिलो पे चढ़ा है तेरे नाम का सरूर है,

माँ है तू हमारी इस बात का गरूर है,

हमने की अरदास प्यार से तूने मानी,

आज मेरे घर में भी जागी तेरी ज्योत नूरानी,

मैं लख लख शुक्र मनाऊ शमा शम नाचू गाऊ,

ये है तेरे प्यार का कमाल माता रानिये,

मिला तेरे लाल को भी लाल माता रानिये,

आज तूने फिर बड़ी किरपा दिखाई है,

रूप द्र कनैया का घर मेरे आई है,

याद तेरे उपकार कृ तो झलके मेरे आँख से पानी,

आज मेरे घर में भी जागी तेरी ज्योत नूरानी,

मैं लख लख शुक्र मनाऊ शमा शम नाचू गाऊ,

दातिए मैं जब से तेरे चरणों से दूर था,

फकर फ़कीर था बड़ा ही मजबूर था,

ज़िंदगी सवार ली जय कारा तेरा बोल के,

दिये सुख सारे मियां तूने दिल खोल के,

सारी दुनिया में न देखा तुझे बड़ा न कोई दानी,

आज मेरे घर में भी जागी तेरी ज्योत नूरानी,

मैं लख लख शुक्र मनाऊ शमा शम नाचू गाऊ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।