साई जी तेरा रंग चड़ेया

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॥ पावन पाठ ॥

साई जी तेरा रंग चड़ेया,

बाबा जी तेरा रंग चड़ेया,

अस्सा लाइयाँ ने ते दसा गए निभा के सो रब दी द्वारे तेरे आके,

साई जी तेरा रंग चड़ेया बाबा जी तेरा रंग चड़ेया,

तेरी पेरी भी ज़माना एमे पेया है,

दर तेरा भी तेखाने काबे जेहा है,

अखा जिहने जिहने तेरे नाल लाइयाँ,

दुरो मंगियां मुरादा ओहना पाइयाँ.

साई जी तेरा रंग चड़ेया बाबा जी तेरा रंग चड़ेया,

तेरी गली बाबा जनता दी गली है तेरी पुष्ट उते पीर मौला अली ऐ,

तेरा मुखड़ा ते साढ़े ले कुरआन है,

तेरी दीद सदा दीं ते ईमान है,

साई जी तेरा रंग चड़ेया बाबा जी तेरा रंग चड़ेया,

मुख तेरा जीवे चौदवी दा चं एह,

तेरा वलियाँ च रुतबा भुलैण्ड एह,

तनु तकया खुदा न तक लेना,

एहो आस्का दिवाणिया दा कहना

साई जी तेरा रंग चड़ेया बाबा जी तेरा रंग चड़ेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।