पालकी रे पालकी साईं की पालकी

पारंपरिक
श्री गणेश भजन साईं भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

पालकी रे पालकी साईं की पालकी,

साईं की पालकी बाबा की पालकी,

प्यार से निहारो मेरे साईं की पालकी,

इस पालकी की शोभा निराली,

आये गणेश और रिधि सीधी प्यारी,

साईं की पालकी बाबा की पालकी,

श्रदा से निहारो साईं की पालकी ,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

पालकी में आये गोरा त्रिपुरारी,

आये कन्हिया और राधा रानी प्यारी,

साईं की पालकी रे देवा की पालकी,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी,

आगे आगे गंगा जल कलश भरे है,

पीछे पीछे ढोल नगाड़े भज रहे है,

हमे भी उठा न है साईं की पालकी,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

भाज रहे ढोल देखो शंख नगाड़े

चारो और गूंज रहे साईं के तराने,

फिकर नही किसी को भी घर और वार की.

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

लग रहा है देवता गा रहे है आरती,

नाच रहे भक्त जैसे बाराती,

धुनी से रम गई है साईं की पालकी,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

आसमान से देखो फूल गिर रहे है,

मस्ताने मस्ती का प्याला पी रहे है,

स्वर्गो से आई है साईं की पालकी,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

इतने दिनों से इंतज़ार हो रहा था,

साईं को देखने को दिल मचल रहा था,

आई वो आई देखो की पालकी,

पालकी रे पालकी साईं की पालकी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।