नीलकंठ पै चढ़के पी गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नीलकंठ पै चढ़के पी गया एक बाल्टी भाँग,

भोला न्यू मटकै,

गौरा माँ नै न्यू सोची भोले म्है बड़गे भूत,

कदे पाँ कदे सिर, कदे पाया नै झटकै कदे वो सिर नै झटकै,

भोला न्यू मटकै.....

नीलकंठ पै चढ़के ........

डम डम डमरू बाजण लाग्या संग म्ह नाँचै भूत,

वो भोला वो शंकर, कदे हाथां नै पटकै, कदे झुल्फा नै झटकै,

भोला न्यू मटकै.......

नीलकंठ पै चढ़के ........

बम भोले का डांस देख कावड़िये हो गये मस्त,

लिखै सिंहपुरिया हटकै भोला न्यू मटकै ,

नीलकंठ पै चढ़के ........

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

9812301662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।