तान तकड़ी ते मन वन्जारा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तान तकड़ी ते मन वन्जारा,

जी सोधा करी सोच सोच के,

इस तान दे ने नौ दरवाजे,

दसवा ठाकुर द्वारा ,

जी सोधा करी सोच सोच के,

तान तकड़ी.........

इस तान अन्दर हीरे मोती,

कोई विरला परखन हारा ,

जी सोधा करी सोच सोच के,

तान तकड़ी.......

इस तान अन्दर नाले नदिया,

कोई नावे नावण हारा,

जी सोधा करी सोच सोच के,

तान तकड़ी.......

इस तान अन्दर ज्योत है जगदी,

जगदी है बिन बाती बिन तेल ,

जी सोधा करी सोच सोच के,

तान तकड़ी........

भव सागर पया ठा ठा मारे,

ऊथे सतगुरु पार लगावण हारा,

जी सोधा करी सोच सोच के,

तान तकड़ी........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।