नी मे माई नु मनावन चालिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दाती दे दर जाना मैं ते,

दाती दे दर जाना मैं ते,सारा जग ठुकरा के,

भक्ति भावना मन विच तारी, मैं सारे परम मिटा के,

पोली माँ तो पुल बकषाणी,

पोली माँ तो पुल बकषाणी, मैं अपना शीश झुका के,

पल-पल पलका खोल के देखा,मै मुख पोली द जा के,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

नी मैं माई नु मनावन चलिया ,

ले चद्रा दी फूल कालिया,

नी मैं माई नु मनावन,

चंगा लगदा माँ दा द्वारा,

सारी दुनिया तो जो नयारा,

चंगा लगदा माँ दा द्वारा सारी दुनिया तो जो नयारा,

भगता नू जान तो प्यारा,

भगता नू जान तो प्यारा ,

मन पावन माँ दियां गलियां,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

आज दिन खुशियां दा आया ,

दाती ने सब नु बुलाया,

आज दिन खुशियां दा आया दाती ने सब नु बुलाया,

बच्चया दा मान बढ़ाया,

बच्चया दा मान बढ़ाया,

संगता नाल संगता रलिया,

संगता नाल संगता रलिया,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

माँ छम छम अखियां बरसन,

तेरे दर्शन नु तरसन,

माँ छम छम अखियां बरसन तेरे दर्शन नु तरसन,

कद आवा तेनु परखन्न,

कद आवा तेनु परखन्न,

ना जान जु दाई या चली या,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

मै रो रो अर्ज गुजारा,

तेरी मूरत मात निहारा,

मै रो रो अर्ज गुजारा तेरी मूरत मात निहारा,

हर वेले तेनु पुकारा,

हर वेले तेनु पुकारा,

जद ठंड़ीआ हवावा चलिया,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

कितै माँ बन ममता वारे,

किते बिगड़े काज सवारे,

कितै माँ बन ममता वारे किते बिगड़े काज सवारे,

किते भवसागर चो तारे,

किते भवसागर चो तारे ,

किते कंजका खेड़न चलिया,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

तेरी सूंदर छवि निराली ,

जगदम्बे शेरा वाली,

तेरी सूंदर छवि निराली जगदम्बे शेरा वाली,

सारे जग दी तू रखवाली,

सारे जग दी तू रखवाली,

तेरी आन दलिजा मलिया,

नी मैं माई नु मनावन चालिया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।