नी मैं नाल श्याम दे लाईयां अखियाँ रस भरीआं

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नी मैं नाल श्याम दे लाईयां, अखियाँ रस भरीआं

किसे ने लाईआं भरी जवानी,

किसे ने लाईआं विच बुढ़ापे

नी मैं बचपन दे विच्च लाईआं, अखियाँ रस भरीआं...

किसे ने लाईआं जग तो चोरी,

किसे ने लाईआं माँ पेयां चोरी,

नी मैं शरेआम ही लाईआं, अखियाँ रस भरीआं...

किसे ने लाईआं भगवा पा के,

किसे ने लाईआं मुंदरा पा के,

नी मैं सत्संग दे विच्च लाईआं, अखियाँ रस भरीआं...

माँपे दुश्मन, सोहरे वैरी,

गल्लां करदे वारो वारि,

नी ओह नित्त उठ दें बुराईआं, अखियाँ रस भरीआं...

किसे ने ला के झूठ बोलिया,

किसे ने ना दिल दा भेत खोलिए,

नी मैं आपे ही देवां दुहाईआं, अखियाँ रस भरीआं...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।