ये जीवन तेरे हवाले मेरे माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ये जीवन तेरे हवाले मेरे माँ मेरी भी पार करो नया,

मुझे न यु विशराओ माँ थाम लो नाइयाँ,

तनहाई में तेरी याद जो आई फिर जो हुआ बेचैन,

क्या करना था क्या कर बैठे गरित बिताये दिन रेन,

अब तो यादो में समाओ माँ दे दे अंचल की छिया,

ये जीवन तेरे हवाले मेरे माँ मेरी भी पार करो नया,

मन के हो तुम में बेबस वो चाहे जिदर ले जाए,

दिल ये वेचारा किस्मत पे आंसू खूब भाये,

इस जग में हम पे क्या गुजारी,

इक तू ही क्या जाने मइया,

माँ हर तेरस माँ को निभा कर निर्धन न तुम से लगाया,

दुनिया भर की चाहता ने माँ ब्रिग तृष्णा बढ़ाया,

आखिर जो पाया वो खो दिया,

भूल हुई मइया,

अश्क भा के जहां में आये मोह में फस के मौज न पाए,

वापिस आके क्या मुँह दिखाए भीतर भीतर क्यों तड़पाये,

अब तो साँझ ढली थक हार गया,शारदे मियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।