ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

तीन लोक में गह्यो अचमबा घयो रे अचम्बा,

बरसे मेगना चली पवन चमके तारे नील गगन,

इन्दर देव का भयो अचम्बा भयो रे अचम्बा रे अचम्बा,

ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

ब्रह्मा भूले वेद पठन नारद भूले नारायण,

विष्णु जी को भयो अचम्बा,

भयो रे अचम्बा,

ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

हनुमत भूले राम भजन भूल गये शिव ॐ रतन,

सबके देवो को भयो अचम्बा,

ना डोर लगी न खम्बा झूला झूल रही अम्बा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।