मैं तो झूम झूम बांटू वधाई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मैया मेरे घर आई मैं तो झूम झूम बांटू वदाई,

कभी देखु इधर कभी देखु उधर,

मेरी आंखे ख़ुशी से भर आई,

मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

ओड्डी चुनरियाँ लाल छाया तेज बेशुमार,

होके सिंह पे सवार मियां आई मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

ढोल बजने लगा झांज बजने लगी,

बाजी बाजी रे मंगल शहनाई,

मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

धुप ढलने लगी छाव होनी लगी,

ठंडी ठंडी चले पुरवाई,

मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

आज पुरे हुए भगतो के अरमान,

माँ को बेटी की याद तो आई,

मैं तो झूम झूम बांटू वधाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।