हे पापविनाशिनी मईया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हे पापविनाशिनी मईया, जगजननी तू है जगतारिणी,

भक्तों के दुख हर ले श्यामा, मईया तू है दुखहारिणी ॥

जप-तप-योग कुछ नहीं जाने, पुत्र तेरा नादान है,

तुझ तक पहुंचे किस राह से, वो बिल्कुल अंजान है ॥

विनती तुझसे है माता, हाथ बढ़ाकर थाम मुझे,

कोई गैर नही हूँ मैं माता, अपना ही बालक जान मुझे ॥

है घोर अंधेरा जीवन में, चिन्ताओं के बादल छाए हैं,

दुःख दारिद्र्य ने मुझको घेर लिया, रोम रोम घबराए हैं ॥

हे माता जगदम्ब भवानी, तुझसे बढ़कर कौन परउपकारी है,

मईया मेरी दया दिखा दे, मुझ पर भीड़ पड़ी अब भारी है ॥

नवीन झा Sundaram

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।