घोटे वाली लाल चुनरियाँ ओड के आजा माँ मेरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घोटे वाली लाल चुनरियाँ ओड के आजा माँ मेरी,

तेरे बच्चे तुझे पुकारे मंदिर छोड़ आजा माँ मेरी,

बच्चे तुझे पुकारे माँ सब कुछ छोड़ के आजा माँ,

मैया तेरे भकत का बेडा तूफानों ने घेर लिया,

कोई सहरा नजर न आये मुँह है सब ने फेर लिया,

सोइ हुई अब ममता है तेरी तू छोड़ के आजा माँ मेरी,

बच्चे तुझे पुकारे ..

गम के बादल गरज रहे है दुःख की बिजली कड़के माँ,

अंधकारो ने खाये उजाले निर्बल का दिल धड़के माँ,

लेहरो की दीवारों को तोड़ के आजा माँ मेरी,

घोटे वाली लाल चुनरियाँ ओड के आजा माँ मेरी,

झुलस गया जीवन मेरा दहशत के अंगारो में ,

अब तक मेरे सदा न पहुंची क्यों तेरे दरबारों में,

तड़प मेरी से दया तू अपनी जोड़ के आजा माँ मेरी,

घोटे वाली लाल चुनरियाँ ओड के आजा माँ मेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।