वैष्णव देवी माँ शेरावाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वैष्णव देवी माँ शेरावाली

दुखिओं की करती है रखवाली

भोग न मांगू, मोक्ष ना मांगू,

धन दौलत कुछ भी ना जानू

तुम कहलाती हो हिमालय सुपुत्री,

ममता प्यार मांगू मतवाली

नव रूपों में, नव कल्पना में,

नव रसों में, नव ग्रहों में

सृष्टि की रचना तेरी दृष्टि से,

लालन पालन करती मेहरा वाली

काल नाशिनी, दुःख हारिणि,

शूल धारिणी, सिंह वाहिनी

भक्तों को तुझ से रहती आस है,

कृपा करोगो हे लाटा वाली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।