माँ नाल गल्लां करिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ नाल गल्लां करिये

सानु सद्देआं बड़ा चिर होया, सब नु बुलान वालिये

विच गमां दे फस गयी जिंदड़ी, किस नु हाल सुनावां

पूत कपूत सुनीदे दाती, मावां ठंडिया छावां

मैं पापी जन्मा दा मैया, किस विद तैनू पावां

दर दर भटका जगदम्बे, था था थेड़े खावां

माँ नाल गल्लां करिये

आई याद तेरी मैं बड़ा रोया, जग नु हसान वालिये

तू कर्मा दी रानी दाती, सुट्टे भाग जगाये

टूटे होए जोड़ देवे दिल, विछड़े आन मिलाये

भूले भटके पापियां नु माँ सीधे रस्ते पाये

तू चाहे ता भटके बेड़े पल विच पार लवाये

माँ नाल गल्लां करिये

दाग दुख नाल किसे ना वी धोया, सब नु बचान वालिये

मैं दर्शन दा पयासा दाती, मेरी प्यास बुझाओ

इस चंचल नु शेरा वाली आ के दर्श दिखाओ

आस दी डोरी टूट ना जावे, आसारानी आवो

हे माँ अम्बे हे जगदम्बे आओ माता आवो

माँ नाल गल्लां करिये

तेरा करम क्यों मेरे ते ना होया, करम कमान वालिये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।