अखिया खोल खोल के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं ता रज रज दर्शन पावा अखिया खोल खोल के,

अखिया खोल खोल के अखिया खोल खोल के,

तेरे चरना दी मैं हा राजी,

तेरे दर तो मुडा ना प्यासी,

तेरे नाम दा प्याला पीना अखिया खोल खोल के,

मैं ता........

तेरे दरश दी मैं हा दीवानी,

अपने चरना दी देजा निशानी,

अखिया प्यासिया नु ना तरसा अखिया खोल खोल के,

मैं ता........

तेरे चरना च मैं रेन गुजारा ,

तैनू रो रो के पुकारा,

अखा थक गईया तक तक राहवा अखिया खोल खोल के,

मैं ता........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।