नर चेत गुमानी माया ना साथ चले

संत कबीर
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॥ पावन पाठ ॥

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले,

माया ना साथ चले,

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले ,

दस से सोला गए खेल में ,

बीस गए तेरे मन के मैल में,

चालीस गए तेरे नारी के फेर में,

पचपन हाथ मले ,

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले ,

अब तो जाग पड़ा क्यों सोवे ,

सोने से तेरा काम ना होवे ,

हर मन की तू कब तक ढोवै,

टाले ना ही टले,

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले,

भजन करे तो हर सुख पावे,

धन दौलत तेरे काम ना आवे,

काया भी तेरे साथ ना जावे ,

अग्नि बीच जले ,

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले,

सुमिरन ध्यान लगा ले प्राणी,

होवें ना तेरी कुछ भी हानि ,

कहत कबीर सुनो अज्ञानी ,

कर ले कर्म तू भले ,

नर चेत गुमानी माया ना साथ चले,

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

98123 01662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।