ज़हर पी गया शिव

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

जहर पी गया शिव कोई ना संभाले

प्रभु वाल्मीकि बचा ले बचा ले

ज़हर पी गया शिव.......

चढ़ा जा रहा है नसों में जहरीला

हुआ जा रहा है बदन नीला नीला

जली मेरी जिह्वा पड़े कंठ छाले

प्रभु वाल्मीकि बचा ले बचा ले

ज़हर पी गया शिव.......

मैं मर मर के पल पल प्रभु जी रहा हूं

समझ खुद को दाता जहर पी रहा हूं

सजा वार को अपने चरणी लगा ले

प्रभु वाल्मीकि बचा ले बचा ले

ज़हर पी गया शिव.......

खड़े हाथ जोड़े यह मंदिर शिवाले

तड़पते हैं राही मेरे नाग काले

तू अमृत दवात में मुझको छुपा ले

प्रभु वाल्मीकि बचा ले बचा ले

ज़हर पी गया शिव.......

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

9812301662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।