मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल

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॥ पावन पाठ ॥

मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल,

रखना उसका ख़याल

हमने दिल के जिस टुकड़े को बाहों का झूला झुलाया माँ

आज यह समझा आज यह जाना वो तो धन है पराया माँ

पलकों के नीचे रखा छुपा कर, पूरा अठारह साल,

मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल

नाज़ों पाली जिस लाड़ली की हमने हर ज़िद की है पूरी माँ

उसी को घर में रख नहीं सकते, हाय कितनी मजबूरी माँ

उसे बिछुड़ते देख के अपना हाल हुआ बेहाल,

मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल

अपनी दया और अपनी दुआ का आँचल उसीको दे देना

मेरी पूजा, मेरे जप टप का फल उसको दे देना

आप की पुतली का कभी जग में बांकी हुए ना बाल

मैया जी मेरी बेटी चली ससुराल

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।