इक बार चले आओ फिर आके चले जाना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

एक बार चले आओ फिर आके चले जाना

जाने नहीं दूंगा मैं जरा जाकर तो दिखलाना

एक बार चले आओ.....

युग युग से प्यासी है दर्शन को मेरी अखियां

बस एक झलक अपनी दिखला कर चले जाना

एक बार चले आओ .......

चरणों से जो लिपटा हूं चरणों को ना छोडूंगा

चरणों की धूली को माथे से लगा जाना

एक बार चले आओ.......

कहते हैं तेरे दर पर रहमत का खजाना है

दो बूंद दया कि तुम बिखरा कर चले जाना

एक बार चले आओ.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।