मनको की है ये माला मेरे काम की नहीं है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज़--कभी बेबसी ने मारा

मनको की है यह माला मेरे काम की नहीं है

इसमें कहीं भी सूरत मेरे राम की नहीं है

मनको की है ये माला........

मैं हूं राम का दीवाना जाने ये सब जमाना

करने को सेवा प्रभु की सांसे मुझे मिली है

इसमें कहीं भी सूरत मेरे राम की नहीं है

मनको की है ये माला........

जाकर बजा दू डंका पल में जला दू लंका

सिया राम बसते मन में ह्रदय छवि बसी है

इसमें कहीं भी सूरत मेरे राम की नहीं है

मनको की है ये माला.......

फिर मुख ना कोई खोलें श्रीराम उठकर बोले

भक्त शिरोमणि है हनुमत श्री राम ने कही है

इसमें कहीं भी सूरत मेरे राम की नहीं है

मनको की है यह वाला...........

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

98123 01662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।