मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो

अनाड़ी मत समझो, अनाड़ी मत समझो,

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

वो है त्रिपुरारी अनाड़ी मत समजो

मेरे भोले बाबा के गले में सर्प माला है,

अरे सर्पो को देख कर सपेरा मत समझो,

सपेरा मत समझो, सपेरा मत समझो,

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे भोले बाबा के हाँथ में डमरू है,

डमरू को देख कर मदारी मत समझो,

मादारी मत समझो, मदारी मत समझो,

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे भोले बाबा के तन मर्ग शाला,

म्र्गशाला को देख के शिकारी मत समजो,

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

मेरे बाबा के संग में है नंदी,

नंदी को देख के व्यपारी मत संजो,

मेरे भोले बाबा को अनाड़ी मत समझो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।