मेरी मां शारदे वीणा को बजाने आजा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मेरी मां शारदे, तू स्वर को सजाने आजा,

आज की रात माँ वीणा को बजाने आजा,

आजा आजा आजा ओ आजा ,

मुझे विश्वास है मा तू तो जरूर आऐगी,

आके मां तू तो वीणा भी बजाऐगी,

भक्ति क्या है, जमाने को दिखाने आजा,

आज की रात, माँ वीणा को बजाने आजा

मेरी मां शारदे, तू स्वर को सजाने आजा,

आज की रात माँ वीणा को बजाने आजा

आजा आजा आजा ओ आजा ...

तेरी वीणा की धुन, सबको सुनाएंगे अभी,

फिर ना आना हम,फिर ना बुलाएंगे कभी,

तेरे भक्तो की, लाज को बचाने आजा,

आज की रात, माँ वीणा को बजाने आजा,

मेरी मां शारदे, तू स्वर को सजाने आजा,

आज की रात माँ वीणा को बजाने आजा,

आजा आजा आजा ओ आजा..

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।