अजब रूप प्यारा प्यारा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोना सोना रूप लगे सोहना सोहना मुखड़ा,

सोने की थाल जैसा चाँद का टुकड़ा,

माँ की चुनर सोहे री,टीका मुनर सोहे री

लगी लिली रात की कुलइया सितारा,

अजब रूप प्यारा प्यारा,

देखे झूमे है आज जग सारा,अजाब रूप प्यारा प्यारा,

कल नोलखा हार पावे पैजनियाँ,

मैया बनी मोरी हजारी दुल्हनियां,

अँखियाँ सुनर सोहे ऋ जय जय कारी गूंजे है जयकारा,

अजब रूप प्यारा प्यारा,

देखे झूमे है आज जग सारा,अजाब रूप प्यारा प्यारा,

दाये हाथ फुलवारी बाये त्रिशूलाव,

और हाथे चूड़ी लागी हार हार सुन्ल्वा,

चंदन रूडी माला ऋ चोली अड़हुल फुलवाड़ी ,

अनीता आल्हम में भक्त है तुमहरा,

अजब रूप प्यारा प्यारा,

देखे झूमे है आज जग सारा,अजाब रूप प्यारा प्यारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।