माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ,

प्रथम हाथ में ढाल लिए दूजे तलवार,

तीजे लिए सिरोही चौथे में कटार ॥

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ॥

पँचवे गदा सम्हारे रे छठवें त्रयशूल,

सातव पकड़े दुश्मन आठव दिए हूल ।

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ॥

चढ़ी सिंह देवी गरजे रे बांधे हथियार,

कौन बीर है रण में जो ठाने रार ।

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ॥

पापी बधे अनेकों रे दुर्गा दसभाल ।

अभिमानी नहीं छोड़े कर दिए हलाल ।

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ॥

कृष्ण उतारे माँ की आरति रे भरि कंचन थार ।

सुरपति चँवर डुलावें कालों की काल ।

माई अष्ट भुजा वाराहनी हो मां ॥

By; Yogesh Tiwari

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।