खुशहाल करती मालामाल करती शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती

लखबीर सिंह लक्खा
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खुशहाल करती मालो माल करती,

शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती,

अम्बे रानी वरदानी बैठी खोल के भंडारे,

झोली ले गया भरा के आया चलके जो द्वारे,

नहीं टाल करती तत्काल करती,

शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती,

हर दुख जाए टल हर मुश्किल को हल,

झोपड़ी से हो महल नहीं लागे एक पल,

मां कमाल करती बेमिसाल करती,

शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती,

मां के नाम वाला अमृत जो पी ले एक बार,

होगा बाल ना बांका चाहे बैरी हो संसार,

रक्षा आप सरल बन ढाल करती,

शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती,

लक्खा लाखों के बदल डाले लिखे मां ने लेख,

टाटा नगर वाले शर्मा की ओर भी तो देख,

ना संभाल करती ना ख्याल करती,

शेरावाली अपने भक्तों को निहाल करती,

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

98123 01662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।