शेरावाली को मनाने हम भी आए हैं

नरेन्द्र चंचल
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आस लाए है मां मुरादे लाए हैं

शेरावाली को मनाने हम भी आए हैं

लाल चोला लाल चुनरिया लाल मात की बिंदी

भक्त तेरे हिंदी पंजाबी बंगाली और सिंधी

तेरी जोत जगाने हम भी आए हैं

शेरावाली को मनाने हम भी आए हैं

हरा है पीपल हरा है पता ऊपर तोता बोले

हरी मैया ने पहनी चूड़ियां देखके मनवा डोले

तेरा दर्शन पाने हम भी आए हैं

शेरावाली को मनाने हम भी आए हैं

जो भी आशा लेकर आए नहीं आश को मेटे

बांझ नारियों के मैया जी गोद खिलावे बेटे

फूल श्रद्धा के चढ़ाने हम भी आए हैं

शेरावाली को मनाने हम भी आए हैं

चरणों में तेरे गंगा बहती पर्वत ऊपर डेरा

नजर कर्म की कर दो मैया दास हूं मैं भी तेरा

धूनी द्वारे पर रमाने हम भी आए हैं

शेरावाली को मनाने हम भी आए

कुमार सुनील फोक सिंगर

हिसार हरियाणा भारत

98123 01662

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।