ओ मैया करती मैं तुम्हारी जय जय कार मैं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय हो दुर्गे माँ आंबे भवानी कल्याणी माँ वरधानी,

पूजो माँ तुझको मैं बारम बार मैं,

ओ मैया करती मैं तुम्हारी जय जय कार मैं,

प्रथम नवराते शेल पुतरी माँ ध्यान तुम्हारा धरती,

दूजे नवराते भ्रमचारनी वर्तन तुम्हारा करती,

तृतीये चंदरघंटा को मनाओ चुनरी और पान चद्दाओ,

नवराति वर्त रखती बार मैं,

ओ मैया करती मैं तुम्हारी जय जय कार मैं,

चोथे नवराते कुछमांडा माँ करू तुम्हारा पूजन,

पंचम स्कंद माँ का सिमरु ध्यन करू जीवन,

कत्यानी का छट नवराते पूजन करू हस्ते गाते,

दर्शन को जाऊ द्वार मैं,

ओ मैया करती मैं तुम्हारी जय जय कार मैं,

साथ नवराते को काल रात्री माँ को मनाऊ,

हाथ में माँ गोरी जगजानी माँ की शरण में जाऊ,

सीधी दाती को नवी मनाऊ कंजक घर में जिमाऊ,

माता रानी का पाऊ प्यार मैं ओ मियाँ करती मैं तुम्हारी जय जय कार मैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।