जय जय चंद्रघन्टा माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चंद्रघन्टा माँ से अर्जी मेरी,

मैं दास बनु तेरा अब जैसे मर्जी तेरी,

दस हाथ शुशोभित है,

सोने सा रूप तेरा जिस पर जग मोहित है,

तू अति बल शाली है,

दुष्टो का दमन करती तेरी शान निराली है,

जादू या अजूबा है,

चन्दर घंटा सवारे दुनिया,

जिसने माँ को पूजा है,

जय जय चंद्रघन्टा माँ

तलवार कमंगल माँ,

घंटे की प्रबल ध्वनि से गूंजे भू मंडल माँ,

माँ का दूध शहद भोग है,

बस पूजन अर्चन से दुःख निकट नहीं आता

तेरी पूजा खुशाली है,

हे मात तू चन्दरघंटा तेरी शान निराली है,

दुःख अंजू का भी हरती,

शरणागत की रक्षा देवेंद्र सदा करती,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।