मईया ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ,

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मईया ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ,

कोर कोर पे कान्हा रे बैठे मुरली भजाये,

मईया सखियों के संग में कान्हा नित रास रचाये,

मईया ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ,

सिंधु के वो वासी रे विष्णु भगवन,

लक्ष्मी चरण दबाबे नागो की छा,

ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ....

गंगा यमुना लिखियो रे दर्शन के जाये,

गंगा और कावेरी हे नर्मदा माये,

ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ...

बीच में मइयां लिखियो रे शृंगार शिवार,

जग तारण के लाने ओ माई लइ अवतार,

मईया ऐसी रंगा दो मोरी चुनरी हो माँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।