जय श्री राम हरे स्वामी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय श्री राम हरे स्वामी जय सिय राम हरे ।

भक्त जनन दुख भंजन कृपा निधान हरे ॥

क्रीट मुकुट सिर शोभित भाल तिलक सोहे ।

कमल नयन छवि सुंदर त्रिभुवन मन मोहे ॥

वाम भाग सिय शोभित आदि शक्ति माता ।

दाहिन लखन विराजत संग भरत भ्राता ॥

उर बनमाल विराजत कर धनु शर धारी ।

भक्त जनन सुखदाता जग मंगल कारी ॥

अवधपुरी प्रभु प्रकटे लीला अमित करी ।

संत जनन सुख दीन्हा धरणी भार हरी ॥

तरी अहल्या नारी पदरज छुअत हरी ।

केवट चरण पखारयो तारयो कृपा करी ॥

जनकराज प्रण राख्यो भंजेउ धनु भारी ।

क्रोध हरयो भृगुपति का प्रभु महिमा न्यारी ॥

प्रणतपाल करुणानिधि दीनन हितकारी ।

करुणासिंधु दयानिधि संतन सुखकारी ॥

बालि त्रषित सुग्रीवहिं ताहि शरण लीन्हा ।

रावण त्रषित विभीषण लंकापति कीन्हा ॥

दशरथ अजिर बिहारी भक्तन सुखकारी ।

हनुमत हृदय विहारी सेवित कामारी ॥

अवध दास प्रभु तुम्हरो भवनिधि मध्य परो ।

कृपा करो करुणानिधि चाहो तो पार करो ॥

आरति श्री सियबर की जो जन नित गावे ।

होय कृपा रघुवर की सुख सद्गति पावे ॥

By; Yogesh Tiwari

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।