देखो फिर नवरात्रि आये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बही भक्ति की गंगा-यमुना, श्रद्धाओं के दीप जलाये।

देखो फिर नवरात्रे आये।

कोई माँ का भवन बुहारे, कोई तोरणद्वार सँवारे,

यज्ञ-हवन में लगे सभी ही, लगा रहे माँ के जयकारे।

भोग लगाता कोई माँ को, कोई चुनरी लाल चढ़ाये,

देखो फिर नवरात्रे आये।

अम्बर कितना चमक रहा है, मातामय हो दमक रहा है,

मेघों का पानी भी जैसे, अमृत बनके छलक रहा है।

सूरज-चंदा और सितारों ने माता के मुकुट सजाये,

देखो फिर नवरात्रे आये।

फिरे पाप अब मारा-मारा, मिला धर्म को पुनः सहारा,

जगी ज्योत जैसे मैया की, दिव्य हुआ संसार हमारा।

आता-जाता हर क्षण मानो, मातारानी के गुण गाये,

देखो फिर नवरात्रे आये।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।