मंदिर में आई शेराँवाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मन मंदिर में आई शेरवाली,

मेहरवाली मैया आई आई ज्योति वाली,

आई माँ दुर्गा माँ आई डेहरो खुशिया लेके आई,

धूम दुर्गा पूजा की है झुमके नाचो रे भाई डंडियां खेलो रे भाई,

महीशा सुर रक्त बीज भयंकर शुम्ब निशुंभ के दानव,

उनकी अत्याचार से रोते देव ऋषि और मानव,

सभी देवताओं का तेज निकलता है महादेवी दुर्गा का रूप फिर बनता है,

माता दुष्टो पे है भारी,

धूम दुर्गा पूजा की है झुमके नाचो रे भाई डंडियां खेलो रे भाई,

ममता माई माँ शेरावाली की भक्ति से पूजा करलो,

माता सबकी झोली भरे गई ध्यान वन्दना करलो,.

चरणों में मईया के शेष झुका लो खुशियों का वरदान माँ से पा लो,

मेरी माँ है मंगल कारी जगत जननी संकट हारी,

धूम दुर्गा पूजा की है झुमके नाचो रे भाई डंडियां खेलो रे भाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।