हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती,

जिसको सताते जिसको रुलाते उस बेटी में क्यों न वस्ती,

हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती,

जिसको दिया तूने ये जीवन छू स्का कोई उसका कैसे तन,

हर बेटी पे डोल रहा मन बेटा तेरा क्यों बन गया रावण,

हर गली गूंजे हर बस्ती,

हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती,

शिक्षा को निकली कर ुचा फिर लौट स्की न वो कैसे फिर,

घर से चली जो तेरे मंदिर मांगे लाज की क्यों भीख बेरोगी ,

चंगुल में जा क्यों फस्ती,

हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती,

बाप भाई रिश्ते बहुत तेरे दोस्त गुरु भी अब रहे गहरे,

बेशीदरिंदा के है बढ़ रहे डेरे मानवता तुझ को माँ गेरे,

नागिन बन क्यों न डस ती,हे माँ मेरी कैसी है तू हस्ती

हर बेटी क्यों ना मुश्काती ना हस्ती हे माँ मेरी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।