जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

झाँझ-मँजीरे बाज रहे हैं, जगमग ज्योत जगी है।

भक्तों के दिल में मैया के, नाम की लगन लगी है।

इच्छा सबकी नैनों भरके, माँ का दर्शन पाना॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

माता का श्रृंगार दिव्य है, देख हृदय हर्षाता।

माथे टीका, माल गले में, शीश पे मुकुट सुहाता।

नैनों में ममता का सागर, चरणों में ये जमाना॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

मैया तो छू के कर देती, पत्थर को भी सोना।

संकट सारे हर लेता है, माँ का रूप सलोना।

आये कोई भी परेशानी, माँ को तुरंत बताना॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

रोये जब कोई दुनिया में, माता उसे हँसाये।

भटकेगा वो कैसे जिसको, माता राह दिखाये।

निर्धन को देती धन मैया, औ' भूखों को खाना॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

दानवदल को मारा माँ ने, जन के कष्ट मिटाये।

देव, यक्ष, गंधर्व भी माँ का, सुमिरन कर सुख पाये।

तीनों लोकों ने पाया है, मैया से नजराना॥

जगराता शेरांवाली का लगता बड़ा सुहाना।

नाच रहा हर कोई हो के भक्ति में दीवाना॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।