माँ अपनी बेटी की तुझको याद कभी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आज नहीं तो कल मुझको तू,

अपने द्वार भुलायेगी,

माँ अपनी बेटी की तुझको याद कभी तो आयेगी,

आयेगी आयेगी तेरी भी भारी आयेगी,

दूर तेरे महलो से दाती छोटा सा घर मेरा है,

रख लेगी तू मान मेरा मुझे भरोसा तेरा है,

तेरे कानो तक मेरी आवाज कभी तो जाएगी,

माँ अपनी बेटी की तुझको याद कभी तो आयेगी,

होठो पे है नाम तेरा माँ आंख से आंसू बहते है,

मैं और मेरा मन हर पल इक दूजे से कहते है,

दूर बहुत दिन तक मुझसे माँ तू भी न रह पाएगी,

माँ अपनी बेटी की तुझको याद कभी तो आयेगी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।