मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मोरी खपर वाली कलिका मैया,

हो रही जय जय कार,

मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो

रन भूमि के कालका मइयाँ,

खपर लेके हाथ में मइयाँ,

कडग धार से मार रही है असुरो को संगार रही है,

खप्पर वाली माँ कहलाये मोहरी कलिका मइयाँ,

मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो ......

रक्त बीज वर्धनी मइयाँ,

एक से इकीस होती मईया,

इक भी खून की बून्द गिरे तो दानव दल बढ़ जाये मइयाँ,

खून की बून्द गिरे न जमीन पर खप्पर में भर लइयो,

मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो

मुख से ज्वाला माता भपकाइ,

मुंडो की माला लटकाये,

क्रोध को माँ का शांत न होवे,

महादेव जब राह में सोये,

पैर धरा जब शिव शाति पर जग पे किरपा करियो,

मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो

खप्पर वाली कलिका मईया जिसपे किरपा तेरी हो मइयाँ,

डूबे कभी न उसकी नइयाँ कलिका मङ्गल यश तोरे गाये भाव से पार लगाइयो,

मैया जी मेरे मन मंदिर में रहियो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।