सांसो में दिल की धड़कन में

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सांसो में दिल की धड़कन में मन की दर्पण में मेरे साई रहते है,

इस आत्मा में जो परमात्मा है साई का ही रूप है,

पुरवाई साई छइयां है साई तोह ही धुप है,

भक्ति में पथ वंदन में धुप चन्दन में मेरे साई रहते है,

सांसो में दिल की धड़कन में मन की दर्पण में मेरे साई रहते है,

जागे जो साई तो जग जाऊ मैं भी सोये तो सो जाऊ मैं,

साई में जन्मा हु साई में पलता हु साई में खो जाऊ मैं,

नींदो में मेरे सपनो में मेरे अपनों में मेरे साई रहते है,

सांसो में दिल की धड़कन में मन की दर्पण में मेरे साई रहते है,

मुझमे हमेशा होते है साई साई में होता हु मैं,

देते है साई आकर दिलासा जब जब भी रोटा हु मैं,

खुशियो में मेरे अशावान में सारे जीवन में मेरे साई रहते है,

सांसो में दिल की धड़कन में मन की दर्पण में मेरे साई रहते है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।