जब जब देखु साई

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

जब जब देखु साई सूरत मन ही मन मुस्काये रे,

बैठे बैठे बोल रहे है जग को राह दिखाये रे,

जब जब देखु साई सूरत........

तेरे दर पे आके देखा झुकता हर इंसान है,

क्या राजा क्या रंक सभी की सुनता ये भगवान है,

ये तो सबको गले लगाए देखके ये हैरान है,

बैठे बैठे बोल रहे है जग को राह दिखाये रे,

जब जब देखु साई सूरत........

प्यार साई का फूलो जैसा खुशबु ये बिखरता है,

भर देता है झोलिया सबकी छुपे से मुस्कुराता है,

तेरे जैसा यार न कोई हम को समज यही पाये रे,

बैठे बैठे बोल रहे है जग को राह दिखाये रे,

जब जब देखु साई सूरत........

तेरे प्यार का मोल नहीं है प्यार का तेरे तोल नहीं है,

प्यार तेरा अनमोल है ऐसा माँ करती बच्चो को जैसा,

तू ममता की दया का सागर सब गागर भर जाए रे ,

बैठे बैठे बोल रहे है जग को राह दिखाये रे,

जब जब देखु साई सूरत........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।