ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे,

संगत नाचे माये नि तेरी संगत नाचे,

शेरो वाली मेहरो वाली सब की है तू माँ रखवाली,

तेरे द्वार पे डंका बाजे,

ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे,

दिन रात माँ द्वार पे तेरे लगते है माँ मेले,

तेरे दर पर हर पल मइयां लगते भक्तो के रेले,

ठंडी शीतल माँ तेरी दर की प्यारी गोपाला,

ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे,

लेके मुरादे दर पे जो आते खाली कभी नहीं जाते,

दूर दूर से भकत माँ तेरे तुजको भेट चढ़ाते,

बीच पहाड़ो भवन माँ तेरा सब को प्यारा लागे,

ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे,

लाल रंग के झंडे तेरे दर पे माँ लहराए,

आसमान में उड़ते पंक्षी तेरी जय जय भुलाये,

अष्ट भुजी माँ वैष्णो रानी की हनुमान चले आगे,

ढोल भाजे माये नि तेरे ढोल भाजे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।