शेलपुत्री भवानी तुम ही हो

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शेलपुत्री भवानी तुम ही हो,

तुम ही हिमांचल दुलारी कहलाती,

नो रूपों में प्रथम तेरी पूजा करने दुनिया ये दर तेरे आती,

शेलपुत्री भवानी तुम ही हो......

हाथ तेरे कमल और त्रिशूल द्रिवय रूप विश्वव पर बिराजे,

लम्बी लम्बी कतारे लगा कर पल में खुशिया सभी देखो पाती,

शेलपुत्री भवानी तुम ही हो......

वस्त्र धारण भवाल शेष सिर पे माँ का मुकट अलौकिक सोहे,

देख शवि कितनी सूंदर है माँ की,

भक्तो पर अपने किरपा लुटाती,

शेलपुत्री भवानी तुम ही हो,

सकल श्रिष्टि में जयकार गुंजित चरण धूलि अंजू पा के गरबित

चरणों में है देवेंदर पुजारी माता मिटी से सोना बनाती,

शेलपुत्री भवानी तुम ही हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।