तू लगा ले जय कारा मेरी मात का

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

तुझे प्यार मिलेगा,

खुला है दरबारा मेरी मात का तुम्हे बेसुमार मिले गा,

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

माँ काटे जग के भव बंधन,

माँ मथुरा है माँ वृन्दावन,

माँ है माँ तो माँ सीता,

माँ है वेद पुराण और गीता,

माँ से पगले प्रीत जोड़ ले तुझे दुलार मिले गा,

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

तू ही किनारो में तू ही मीनारों में,

सूरज में तारो में तू ही बहारो में,

तू ही गुलाबो में तू ही शबाबो में,

तू खाव्बो में तू ही नकाबों में,

तू ही समंदर में तू ही कलंधर में,

तू ही है मंदिर में तू ही है चन्दर में,

तू है राम में तू है श्याम में,

तू ही है नानक में तू ही महोमबद में,

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

माँ है मंदिर और शिवाला माँ के आगे झुके हिमाला,

माँ है पूजा माँ है भक्ति,

माँ निर्धन निर्बल की भक्ति,

माँ से पगले प्रीत जोड़ ले.

तुजे दीदार मिले गा,

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

माँ से बड़ा न कोई जग में किरपा करती माँ पग पग में,

माँ है चारो धाम का तीरथ माँ से पुरे सभी मनोरथ,

माँ से पगले प्रीत जोड़ ले तुझे ये अपार मिले गा,

तू लगा ले जय कारा मेरी मात का,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।