जे तू फड़दा ना साडी बाहँ असां रुल जाना सी

स्वामी भुवनेश्वरी देवी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन विविध भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जे तू फड़दा ना साडी बाहँ, असां रुल जाना सी

सानु किते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

नचदी तपदी यह जिंदगी होनी सी,

मेरे जीवन दी कोई होर कहानी होनी सी

जे तू ना मिलदा घनश्याम, असां रुल जाना सी

सानु किते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

भावें लखां होण जबान ते गुण नहीं गा सकदी

मेरे मालिक तेरा कर्ज अदा नहीं कर सकदी

जे तू देंदा ना खुशीआं, असां रुल जाना सी

सानु किते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

कई जनम होए बर्बाद ना रास्ता मिलिया सी

होई किरपा ते जिंदगी दा यह फूल खिलया सी

जे तू देंदा ना ठंडी छा, असां रुल जाना सी

सानु किते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

तू मेरा ए मैं तेरा यह रिश्ता टूटे ना,

भावे छूट जावे जग सारा तेरा दर छूटे ना

जे दर ते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

सानु किते ना मिलदी थां, असां रुल जाना सी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।