महालक्ष्मी स्तोत्र

पारंपरिक
महादेव स्तोत्र दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।

नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता:प्रणता:स्म ताम् ॥

तामग्निवर्णाम् तपसा ज्वलंतीम् वैरोचनी कर्मफलेषु जुष्टाम्।

दुर्गादेवीं शरणम् प्रपद्दे सुतरसि तरसे नम:॥

देवीं वाचम् जनयंतं देवास्ताम् विश्वरूपा: पशवो वदंति ।

सा नो मंद्रेषमूर्जं दुहानां धेनुर्वागस्मानुप सुष्टुतैतु ॥

कालरात्रि ब्रह्म सुताम् वैष्णवी स्कंदमातरम् ।

सरस्वती अदिति दक्ष दुहितर:नमाम: पावनां शिवाम् ॥

महालक्ष्मयै च विद्महे शर्वशक्तये च धीमहि ।

तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥

नमो विराट स्वरूपिण्यै नम:सूत्रात्मकै ।

नमो अव्याकृतरूपिण्यै नम: श्री ब्रह्मरूपिणे ॥

यद्ग्यानाजगत्भाति रज्जु:सर्वस्त्रगादिवत् ।

यज्ग्यानालयमाप्नोति नुमस्तां भुवनेश्वरी ॥

नुमस्तत् पदलक्ष्यार्थाम् चिदेकशरूपणीम् ।

अखण्डानंदरूपाम् तां वेदतात्पर्य भूमिकाम् ॥

पंचकोशातिरिक्ताम् ताम् अवस्था त्रयसाक्षिणीम् ।

पुनस्तवं पद लक्ष्यार्थाम् प्रत्यागात्यस्वरूपणीम्॥

नम:प्रणवरूपायै नमो ह्रींकाररूपये ।

नाना मंत्रिकात्मिकायै दुर्गादेव्यै नमो नम:॥

द्वारा :योगेश तिवारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।