सालासर में बाबा का जो दरबार न होता

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

सालासर में बाबा का जो दरबार न होता,

हम भक्तो का फिर बेडा कभी भी पार न होता,

सालासर में भक्तो की आशाये कौन पुगाता मेहंदीपुर में कष्टों का फिर साया कौन भगाता,

दुःख ही दुःख होता सुख का कोई आधार न होता,

हम भक्तो का फिर बेडा कभी भी पार न होता,

मितली ना कोई मंजिल सब रहते बीच डगर में तूफानों में कोई नइया फस्ती है जैसे भवर में,

वो नइयाँ दुबे जिसका खेवन हार न होता,

हम भक्तो का फिर बेडा कभी भी पार न होता,

सब करते रहते निंदा आपस में इक दूजे की और कोई कभी न कहता के भाई जय बाबा की,

सोनी आपस में किसी का कभी प्यार न होता,

हम भक्तो का फिर बेडा कभी भी पार न होता,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।