साई सूफी पोएट्री रिहा करदो साई आशीष

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

रिहा करदो पंछी को पिंजरे से,

सैलाब में जान भी बच सकती है, सहारा ए कतरे से,

मुश्किल घड़ी में किसी के काम आओ तुम,

इबादत में लिखेगा नाम, जिसकी जान बचाई तुमने खतरे से,

कभी उन पन्नो पे भी जिल्द चढ़ा दो,

जो तुमने फटे पन्ने देखे अभी है बिखरे से,

मायूस चेहरे पे कभी ख़ुशी की वजह बनो,

साईआशीष से बेरंग चहरे भी दिखे निखरे से,

उधर देखो उससे भी हौसला कही मिला,

जो चिराग बिना डरे जल रहा था अँधेरे से,

अभी वक्त तो सोच रेंगेगा या दौड़ेगा,

नेक मंज़िल की दौड़ है मौत के पहरे से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।