शिरडी को छोड़ अगर सो साल हो गये

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॥ पावन पाठ ॥

साई मेरा सकून मेरा दिल तुम ही तो हो

मैं जिसको ढूंढ़ता हु मंजिल तुम ही तो हो,

आजा तू आके देख ले क्या हाल हो गये,

हम हाल में साई तेरे बेहाल हो गये,

दो चार दिन की बात हो तो साई मेरे आ,

शिरडी को छोड़ अगर सो साल हो गये,

दर्श दिखा दे साइयाँ अपना बना ले साइयाँ,

इक वारि आजा साई अपने शहर में,

शिरडी है तेरी जान अपने गाओ में आजा,

वो नीम की मीठी सी ठंडी छाँव में आजा,

सुना तेरा बिस्तर पड़ा बन कर के खिलौना,

तुझको भुला रहा तेरा पत्थर का बिशॉना,

वो चाबड़ी बाबा तेरी करती है दोहाई,

तुझे क्यों भुला रही है तेरी द्वारका माई,

कहती है बार बार तेरा प्यार चाहिए,

सुनी मेरी महफ़िल है मेरा यार चाहिए,

दीदार चाहिए तेरा प्यार चाहिए

दर्श दिखा दे साइयाँ अपना बना ले साइयाँ,

इक वारि आजा साई अपने शहर में,

जबसे गये बाबा तुम अपनी शिरडी छोड़ कर,

पुरे बदन पे अपना साफा सा ओड कर,

देखा न तूने इक बार अपने गांव को,

ये चाँद सितारे ना कभी धुप छाओ को,

बाबा तुम्हारा गाओ अब गाओ ना रहा,

कच्चे माकन का निशान नाव ना रहा,,

कर कर के इंतज़ार नैना लाल हो गये,

शिरडी को छोड़ अगर सो साल हो गये,

दर्श दिखा दे साइयाँ अपना बना ले साइयाँ,

इक वारि आजा साई अपने शहर में,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।