किसकी शरण में जाऊं

मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

किसकी शरण में जाऊं अशरण शरण तुम्ही हो ॥

गज ग्राह से छुड़ाया प्रह्लाद को बचाया

द्रोपदी का पट बढ़ाया निर्बल के बल तुम्ही हो ॥

अति दीन था सुदामा आया तुम्हारे धामा

धनपति उसे बनाया निर्धन के धन तुम्ही हो ॥

तारा सदन कसाई अजामिल की गति बनाई

गणिका सुपुर पठाई पातक हरण तुम्ही हो ॥

मुझको तो हे बिहारी आशा है बस तुम्हारी

काहे सुरति बिसारी मेरे तो एक तुम्ही हो ॥

द्वारा़ :योगेश तिवारी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।