जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

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॥ पावन पाठ ॥

जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

नहीं है वो पाने के काबिल नहीं है

जो है वो अभी है यही है हम उसमें

किसीको दिखाने के काबिल नहीं है

हम उसके ही द्वारा ये सब देखते है

वो है बस बताने के काबिल नहीं है

ना होते हुए है ऐसा जो भासता है

वह विस्वाश लाने के काबिल नहीं है

जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

जो है वो भुलाने के काबिल नहीं है

जो है वही सत है वह परमात्मा है

असत से छिपाने के काबिल नहीं है

पथिक तुम जहाँ हो वहीँ पर तो वो है

वो खोज लगाने के काबिल नहीं है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।